गुरुवार, 14 मई 2009

कुछ भूली बिसरी यादें

आज पुष्पेन्द्र प्रताप जी ने ज्ञान दिया की रोमन मैं नही वरन हिन्दी में कैसे लिखे तो अब कल से हिन्दी में जरी होगा!